Success Story Of IAS Topper Shivam Sharma

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Success Story Of IAS Topper Shivam Sharma: शिवम शर्मा मुख्यतः आगरा के रहने वाले हैं और उनका जन्म और शुरुआती पढ़ाई यहीं हुई है. बारहवीं के बाद शिवम ने जेईई एग्जाम दिया और सेलेक्ट होकर पहुंच गए कानपुर आईआईटी. यहां से ग्रेजुएशन करने के बाद कुछ समय शिवम ने नौकरी भी की. पहली जॉब मिली उन्हें जापान में जहां कुछ समय काम करके वे भारत वापस आ गए और यहां की एक बड़ी कंपनी में काम करने लगे. अपने काम के दौरान उनका साबका भारतीय कृषि और किसानों से पड़ा और इस क्षेत्र ने उन्हें खासा आकर्षित किया. शिवम को लगा कि अगर किसानों के और खेती के लिए कुछ काम करना चाहते हैं तो उसका बेहतरीन तरीका है सरकार के साथ मिलकर काम करना और सिविल सर्वेंट बनने के लिए यूपीएससी से बढ़िया जरिया क्या हो सकता है. ये सोचकर शिवम ने इस ओर कदम बढ़ाया और लगी-लगाई बढ़िया नौकरी छोड़ यूपीएससी जैसे अनिश्चत क्षेत्र में आ गए.

तीन प्रयास, तीन मेन्स और दो में सेलेक्शन –

शिवम की यूपीएससी जर्नी काफी मजेदार रही. पहले ही प्रयास में शिवम मेन्स तक पहुंच गए पर आगे नहीं बढ़ सके. अगले दो प्रयासों में उनका फाइनल सेलेक्शन हुआ. साल 2018 में 251 रैंक पाने वाले शिवम साल 2017 में भी सेलेक्ट हो चुके थे और रैंक के अनुसार उन्हें इंडियन रेवेन्यू सर्विस एलॉट हुई थी. तीसरे प्रयास के दौरान शिवम इसी के अंतर्गत ट्रेनिंग कर रहे थे. ट्रेनिंग में रहते हुए ही उन्होंने तीसरा प्रयास दिया और सफल भी हुए.

शिवम के पास ग्रेजुएशन में मैकेनिकल इंजीनियरिंग विषय था इसलिए उन्होंने इसी विषय को यूपीएससी के ऑप्शनल विषय के रूप में भी चुना.

ऑप्शनल में पाए हाइऐस्ट अंक –

शिवम ने साल 2018 में अपने ऑप्शनल यानी मैकेनिकल इंजीनियरिंग में सबसे अधिक अंक पाए थे. यही नहीं तीन मेन्स लिखने वाले शिवम ने हर अटेम्प्ट में ऑप्शनल में नंबर इम्प्रूव किए. अपने अनुभव को साझा करते हुए वे कहते हैं कि इस विषय के अपने फायदे, नुकसान और चैलेंज हैं जो किसी भी कैंडिडेट को फेस करने पड़ते हैं.

सबसे पहले आते हैं फायदे पर तो शिवम कहते हैं कि यह विषय बहुत ही स्कोरिंग है. दूसरी बात कि ये पूरी तरह से इंट्रेस्ट पर आधारित सब्जेक्ट है यानी आपको रुचि है तो यह विषय आपके लिए बेस्ट परिणाम लाएगा. तीसरी बात है इस विषय का नेचर जोकि लॉजिकल है. थोड़ा सा लॉजिक लगाकर अपने उत्तरों को सही किया जा सकता है, यहां बहुत रटना नहीं होता.

मैकेनिकल इंजीनियरिंग के चैलेंज –

अब बात करें चैलेंजेस की तो इस विषय में कांपटीशन बहुत है क्योंकि इंजीनियरिंग विषय है, बहुत लोग लेते हैं. लेंदी बहुत है यानी कोर्स खत्म ही नहीं होता और इस वजह से अंत में रिवीजन करने में बहुत समस्या होती है. खासकर जीएस के साथ इस विषय का रिवीजन हो ही नहीं पाता. अगला बिंदु के रिस्की विषय है. अगर एक भी कैलकुलेशन गलत हुआ और आंसर गलत आया तो जीरो नंबर मिलते हैं. बीस नंबर के प्रश्न में कई चरणों में न्यूमेरिकल हल करते हुए अगर एक भी जगह गड़बड़ हुई तो सीधा जीरो मिलता है. हालांकि शिवम यह भी बताते हैं कि इन चैलेंजेस से पार पाया जा सकता है. ऐसी कोई समस्या नहीं जिसका हल न हो.

कैसे करें तैयारी –

शिवम इस विषय की तैयारी के लिए सलाह देते हैं जमकर प्रैक्टिस करने की. वे कहते हैं कि न्यूमेरिकल्स जितना अभ्यास करेंगे उतने अच्छे से कर पाएंगे. वे खुद दिन में चार से पांच घंटे केवल सवाल हल करते थे. यही नहीं शिवम कहते हैं कि इतने सवाल लगाओ की प्रश्न देखते ही समझ जाओ कि इसे कैसे हल करना है. इसके लिए पिछले साल के पेपर देखो.

जीएस के साथ रिवीजन नहीं हो पाता इसलिए जीएस पहले ही रिवाइज कर लो वो भी इतनी बार कि एंड में रिवीजन की जरूरत न पड़े और वह समय मैकेनिकल इंजीनियरिंग को दे सको. खूब टेस्ट दो ताकि अपनी कमियां जान सको और उनसे बच भी सको. इस विषय की खूबी यह भी है कि अगर एक बार आपने इसे ठीक से तैयार कर लिया तो अगले साल दोबारा परीक्षा देने की जरूरत पड़ने पर आपको बहुत मेहनत नहीं करनी पड़ेगी. आखिरी फायदा यह कि इसकी कोचिंग, गाइडेंस, नोट्स सब बहुत आसानी से उपलब्ध हैं.

IAS Success Story: हमेशा टॉप करने वाले अंकुश ने UPSC परीक्षा में भी बनाए रखा रिकॉर्ड और दूसरे प्रयास में क्रैक किया एग्जाम   

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